16 जुलाई 2019 - 15:48
किस तरह मीडिया पर छा गया सैयद हसन नसरुल्लाह का इंटरव्यू? ईरान के तेल टैंकर के प्रकरण में ब्रिटेन की बदनामी

तुर्की में भारत के पूर्व राजदूत ने ईरान के तेल टैंकर को रोकने के ब्रिटेन के क़दम की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि इस क़दम का अंतर्राष्ट्रीय क़ानूनों के परिप्रेक्ष्य में कोई औचित्य नहीं है और ईरान इस पर उचित प्रतिक्रिया दिखाएगा।

एम.के. भद्रकुमार ने अपने एक इंटरव्यू में कहा कि ब्रिटेन ने यह क़दम, ईरान के जवाब को आज़माने के उद्देश्य से उठाया है और उसने यह काम, वाॅशिंग्टन की ओर से किया है लेकिन उसे इसकी क़ीमत चुकानी पड़ेगी। भद्रकुमार ने, जो तुर्की और उज़बेकिस्तान में भारत के राजदूत रह चुके हैं, कहा कि इस समय जो कुछ हो रहा है, वह मूल रूप से वही है जिसकी ओर ईरान के विदेश मंत्री मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने एक बार संकेत किया था और वह यह कि "बी टीम" काम कर रही है। बी टीम का अर्थ है वाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जाॅन बोलटन, इस्राईल के प्रधानमंत्री बेनयामिन नेतनयाहू, सऊदी युवराज बिन सलमान और इमारात के युवराज बिन ज़ायद। ज़रीफ़ ने इन लोगों को "बी टीम" की उपाधि दी है।

 

भारत के पूर्व कूटनयिक एम.के. भद्रकुमार ने ईरान की वायु सीमा में जासूसी ड्रोन भेजने जैसी वाॅशिंग्टन की भड़काऊ कार्यवाही को, अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प को सैन्य टकराव की ओर बढ़ाने की "बी टीम" की कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि वे यह देखना चाहते हैं कि ईरान की प्रतिक्रिया किस प्रकार की होगी। इसे सीधे रूप से ट्रम्प का काम नहीं कहा जा सकता, यह "बी टीम" का काम है। उन्होंने ब्रिटेन की गुप्तचर सेवा को ईरान के तेल टैंकर को रोकने की कार्यवाही के लिए मुख्य रूप से ज़िम्मेदार बताया और कहा कि ब्रिटिश ख़ुफ़िया विभाग के अमरीका व इस्राईल की गुप्तचर एजेंसियों से निकट संबंध हैं।

 

तुर्की और उज़बेकिस्तान में भारत के पूर्व राजदूत भद्रकुमार ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि ब्रिटेन ने स्वयं यह काम किया होगा बल्कि वह सामने है और उसके पीछे रह कर अमरीका यह सब करवा रहा है। उन्होंने कहा कि ईरानी इस पूरे मामले का बहुत गंभीरता व बुद्धिमत्ता से नज़र रखे हुए हैं और वे जानते हैं कि अगर उन्होंने बहुत कड़ी प्रतिक्रिया दिखाई तो दूसरा पक्ष इसे एक बहाने के रूप में इस्तेमाल कर सकता है। उन्होंने कहा कि स्थथति बहुत ख़तरनाक है क्योंकि दोनों पक्षों के सामने कुछ बड़े ख़तरे हैं। उन्होंने कहा कि ईरान के ख़िलाफ़ जो क़दम उठाए जा रहे हैं उनका लक्ष्य यह है कि पहले तो उसकी प्रतिक्रिया के स्तर को आंका जाए और दूसरे ट्रम्प पर भी दबाव डाला जाए कि उनके पास सैन्य कार्यवाही की अनुमति देने के अलावा कोई मार्ग नहीं है।